💐सूप तथा छलनी 💐
सूप तथा छलनी एक प्रसिद्ध सूफी संत थे उनके बारे में मान्यता थी कि वे किसी भी व्यक्ति से मिलते ही एक बार में उनके मनोभावों को जांच परख कर लेते थे। एक बार उन फकीर से मिलने एक व्यक्ति आया उस व्यक्ति को देखकर फकीर बोले यह लो" सूप "आ गया कुछ देर पश्चात उनसे मिलने एक शहर का धनाढ्य व्यक्ति आया तो संत उन्हें देखकर बोले यह लो "छलनी "आ गई। पास खड़े शिष्य को दोनों बातें सुनकर बड़ा ही आश्चर्य हुआ संकोच करते हुए शिष्य ने गुरुजी से पूछा की है गुरुदेव आपने जो दो व्यक्ति आय उन दोनों के लिए अलग-अलग वक्तव्य दिए कृपया करके मुझे उनका अर्थ स्पष्ट कीजिए। गुरुदेव कहते हैं कि जो व्यक्ति को मैंने सूप कहा उसका अर्थ है कि जिस प्रकार सूप कचरे को बाहर निकाल देता है और अच्छी वस्तुओं को अपने पास रखता है एवं छलनी का अर्थ है कि जो कचरे को अपने में समाए समाई रहती है और उपयोगी वस्तुओं को बाहर निकालती है ठीक इसी प्रकार शिष्य को गुरुदेव ने समझाया जो व्यक्ति लोभ, मोह ,माया को अपने में समाए हुए परमात्मा तत्व को स्वीकार नहीं करता है वह एक छलनी के समान ही हैं ।और जो व्यक्ति इन मोह ,माया ,लोभ ,लालच ...