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Showing posts from March, 2022

पापमोचिनी एकादशी

 चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है|  राजा मन्धाता ने धर्म  के ज्ञाता और गूढ़ रहस्यों को बताने वाले महर्षि लोमस से पूछा, कि हे  ऋषिश्रेष्ठ  मनुष्य के पापों को कैसे नष्ट किया जा सकता है कोई सहज एवं सरल उपाय बताइए | इस पर ऋषि श्रेष्ठ ने कहा हे राजन मैं आपको पापमोचनी एकादशी के व्रत की कथा सुनाता हूं इसे सुनकर मनुष्यों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं |ध्यानपूर्वक श्रवण कीजिए|  प्राचीन काल में चैत्ररथ नामक एक वन हुआ करता था जिसमें अनेक अप्सराएं किन्नरों के साथ विहार करती थी वहां सदैव बसंत का रमणीय मनोहारी मौसम रहता था ,नाना प्रकार के पुष्प तथा वनस्पतियों से यह जंगल आच्छादित  रहता था उस वन में देवी -देवता ,गंधर्व ,किन्नर ,अप्सराएं आदि का आवागमन सदैव बना रहता था | उसी उसी वन में मेधावी नाम के एक ऋषि तपस्या में लीन रहते थे ,वह शिव जी के अटूट भक्त थे | एक दिन मंञ्जुघोषा  नाम की एक अप्सरा ने उनकी निकटता का लाभ लेने की चेष्टा से उनके निकट कुछ दूरी पर बैठकर वीणा द्वारा मधुर स्वर निकालने लगी| उसी क्षण कामदेव भी महर्षि को जी...

जानें होली का वास्तविक स्वरूप

 अब आप होली का वास्तविक स्वरुप समझे। इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है। यथा– तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष) अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह। (भाव प्रकाश) अर्थात्―तिनके की अग्नि में भुने हुए (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं। यह होलक वात-पित्त-कफ तथा श्रम के दोषों का शमन करता है। (ब) होलिका―किसी भी अनाज के ऊपरी पर्त को होलिका कहते हैं-जैसे-चने का पट पर (पर्त) मटर का पट पर (पर्त), गेहूँ, जौ का गिद्दी से ऊपर वाला पर्त। इसी प्रकार चना, मटर, गेहूँ, जौ की गिदी को प्रह्लाद कहते हैं। होलिका को माता इसलिए कहते है कि वह चनादि का निर्माण करती (माता निर्माता भवति) यदि यह पर्त पर (होलिका) न हो तो चना, मटर रुपी प्रह्लाद का जन्म नहीं हो सकता। जब चना, मटर, गेहूँ व जौ भुनते हैं तो वह पट पर या गेहूँ, जौ की ऊपरी खोल पहले जलता है, इस प्रकार प्रह्लाद बच जाता है। उस समय प्रसन्नता से जय घोष करते हैं कि होलिका माता की जय...

जो बाहर है वही भीतर है! (Reflection of light, resemble to life)

    According to Kirchhoff's law , the apparent colour of an Opaque object  depend on the wavelength of The Light That it reflected.  for example an apple appears red because it reflect red light wavelength. Now how this theory work on our life? How does affect on our family ,society etc . Above theory, we saw that  objects look like a colour which colour that reflect. we drop 7 colour of light or white colour or Sunlight on an apple the Apple reflects only the red colour and  rest colour of absorbed . Same here so many colour like as anger,  love , lust,  affection, attraction, greediness,  helpful ,caring So more propagate towards us.  Now is our turn,  which colour absorbed and which colour reflects by you. It is depend understand ownself. If you are filled up with anger, hate ,Greediness, sorrow,  abuse etc then it will come out from you. And if you are filled up with the peace, love ,care ,helpful the then it will ever cre...

क्यों नहीं होते शुभ कार्य होलाष्टक में?

सभी भक्तजनों को जय श्री राधे कृष्णा इस वर्ष अर्थात 2022 में होलाष्टक का प्रारंभ फागुन माह के शुक्ल पक्ष अर्थात अष्टमी तिथि अर्थात 10 मार्च से प्रारंभ होकर फागुन माह की पूर्णिमा अर्थात 17 मार्च तक रहेगा| आइए जानते ही क्यों नहीं किए जाते शुद्ध एवं मंगलकार्य होलाष्टक में - पौराणिक मान्यता के आधार पर हिरणकश्यप ने अपने पुत्र, श्री नारायण भक्त पहलाद को फागुन मास की अष्टमी से कष्ट एवं यातना देना प्रारंभ की अनेकों योजनाएं बनाकर भक्त प्रहलाद को मारने की कोशिश करते रहे| परंतु प्रभु श्री हरि की कृपा से वह हर षड्यंत्र से बच निकलते थे अंत में फागुन माह की पूर्णिमा को हिरणकश्यप ने अपनी बहन होलका जिसे अग्नि में ना जलने का वरदान था उसे बुलाया| वह भक्त पहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि स्नान करने लगीं परंतु श्री हरि की कृपा से प्रहलाद तो बच गए और होलका जलकर खाक हो गई | इस प्रकार 8 दिनों में ग्रहों का स्वभाव बहुत ही उग्र होता है यह स्वभाव शुभ कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता| यही कारण है कि कोई भी शुभ कार्य तथा मांगलिक कार्य इन दिनों में नहीं किए जाते | जय जय श्री राधे कृष्णा