एक पग प्रभु की ओर

         भाग 1                                                   ज्ञान पिपासा                                    दिनांक 25 / 04 / 21 

             " प्रत्येक क्रिया  के बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है | " गति का तृतीय नियम ,न्यूटन 

अर्थात जीवन में इस नियम को इस प्रकार देखते है है की जैसा आप कर्म ( क्रिया ) करते है ठीक उसी के अनुकूल 

आपको परिणाम (प्रतिक्रिया ) प्राप्त होते है |

                                                        अब प्रश्न उठता है कि हम स्वंय  के लिये क्या चाहते है ? वही कार्य व्यवहार हमें

 दूसरों के साथ करना होगा | हम यहाँ एक शब्द और जोड़ना चाहेंगे वह है ब्याज (interset ) | यदि हमारे कर्म वेद ,

 शास्त्रों और मानवता के अनुकूल है तो हमें बेहतरीन  परिणाम ब्याज सहित अर्थात कई गुना बढ़कर  मिलते है और

 यदि हमारे कार्यकलाप प्रतिकूल है तो दंड भी कई गुना बढ़कर मिलता है |

                                                                                                          जय श्री राधे कृष्णा 😊👐

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