महर्षि दधिचि का संदेश
🌹महर्षि दधीचि का संदेश🌹
महर्षि दधीचि ने राष्ट्र धर्म के हित में अपनी हड्डियों का दान कर दिया था।
उनकी हड्डियों से तीन धनुष बने-
1. गांडीव
2. सारंग
3. पिनाक
जिसमें से गांडीव अर्जुन को मिला था, जिसके बल पर अर्जुन ने महाभारत का युद्ध जीता।
सारंग से भगवान राम ने रावण से युद्ध किया था और रावण के अत्याचारी राज्य को ध्वस्त किया था।
और, पिनाक भगवान शिव के पास था जिसे तपस्या के द्वारा रावण ने शिव जी से प्राप्त किया था। परन्तु, वह उसका भार लम्बे समय तक नहीं उठा पाने के कारण बीच रास्ते में जनकपुरी में छोड़ आया था। इसी पिनाक की नित्य सेवा श्री सीता जी किया करती थी। पिनाक का भंजन करके ही भगवान श्रीराम ने सीता जी का वरण किया था।
ब्रह्मर्षि दधिचि की हड्डियों से ही "एकघ्नी नामक वज्र" भी बना था, जो भगवान इन्द्र को प्राप्त हुआ था। इस 'एकघ्नी वज्र' को इन्द्र ने कर्ण की तपस्या से खुश होकर कर्ण को दे दिया था। इसी एकघ्नी वज्र से महाभारत के युद्ध में भीम का महाप्रतापी पुत्र घटोत्कच कर्ण के हाथों मारा गया था। महर्षि दधीचि की हड्डियों से अनेक अन्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण भी हुआ था।
महर्षि दधिचि द्वारा किये गए अस्थि-दान का उद्देश्य व सन्देश क्या था...?
हिन्दुओं के सभी धर्मग्रन्थों से लेकर ऋषि मुनियों तक सबका स्पष्ट सन्देश और आह्वान रहा है कि....''हे सनातनी वीरो...शस्त्र उठाओ और अन्याय तथा अत्याचार के विरुद्ध युद्ध करो।''
आज हिंदुओं की एक बड़ी कमजोरी उनकी शस्त्रों के प्रति उदासीनता भी है। कोई भी ऐसा काल नही रहा है जब मनुष्यों को शस्त्रों की आवश्यकता नही पड़ी हो।
आज भी राष्ट्र, धर्म और समाज की रक्षा के लिए अंततः बस एक ही मार्ग है
सशक्त बनो...!!
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🙏🙏
By smt. Sandhya Saxena
Jai shri radhe Krishna
ReplyDeleteRadhe
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